कविता काव्य
कैलारी ५ बैजपुर कैलाली याड आइठ जब टोहार रोइठुँ राटके
मन रुइठ टोहार फोटो टोइठुँ राटके
मोर आँसके मोल कहाँ बुझ्बो झे टु?
टभुन आँसले सिर्हन्नी ढोइठुँ राटके
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घरी घरी हिर्डम प्रहार कर्लो टभु जियल बटुँ
मल्हम डेेेखाके छुरिया मर्लो टभु जियल बटुँ
साटु जनम साठ नै छोर्ना बाचाबन्ढन टुर्के
आज डोसरके माङ भर्लो टभु जियल बटुँ