कुस्मी सागर
कैलाली
महिन सही डगरमे नेंगे सिखाडेउ ।
मनमे जोस जाँगर फेन लगाडेउ ।
दुनियाँ बहुत बाघे गैसेकल अब्बे,
टबे मोर जिन्गीहे आघे बर्हाडेउ ।
मेर छाइ छावा करिया भाँरा मिस्ठैं,
ओइनहे पर्हाके शिक्षित कराडेउ ।
जिन्गी काहो बुझैना कर्रा बा यहाँ,
बुझ पचुइयनहे हलि बुझाडेउ ।
कैसिक पार लगाउँ अपन जिन्गीहे,
अरे संघरियो कोइटो उपाय बटाडेउ ।