118094104_634181774165510_4411690921537666889_n

हलहल अाके अपन गाउँ झलमल बनैम।
ढेङ्ग ढेङ्ग डम्मारा फोर्के फें समटल बनैम।

कट्ना बाँचु आनक देशमे साहुके शोषणसे,
अाब अपन ठाउँहे बिकसित अब्बल बनैम।

परिश्रम पसिना बहैम अपन जन्मभुमि मे,
बाँझ खेत्वा फुटाइक लाग ज्यावल बनैम।

जगा देबु बस्ती बस्ती देश बिकासके लाग,
बिकासके लाग लर्ना लावा मजा दल बनैम।

हटैबु सब गरिब ओ पच्गुरल पन देशमे फें,
भस्काके झोंपरी यहाँ बद्री छुना महल बनैम।

   संगम कुश्मी।

कैलारी 8, कैलाली।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ