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मुना चौधरी

हमरा सिखेलकै दिनमे इजोत हैछै
या राइतमे अन्हार
लेकिन यी नै सिखेलकै
हमरा
जीवनमे कैहियो हैछै इजोत या कैहियो अन्हार
बाँकी सब दुनियादारी, बैमानी, कुनियत, बदनियत
सिखैलकै हमरा यी संसार ।
ह,यी संसार स्वार्थसे भोरल छै ।

पाठशाला सिखाइलकै हमरा झुकैले
इमानदार बनैले
दिन, दुखीके सहयोग करैले, आदर करैले
लेकिन जीवनके पाठशाला सिखाइलकै हमरा
पत्थरके जवाफ पत्थरसे दैले

कोइ हमर लग येलै त
हमर फाइदा उठाइले मात्रे येलै
कोइ हमर से बोललै त
हमर मनके बात लैले मात्रे बोललै
जे साथ दैले हमरा येलै
ऊ आफन स्वार्थ पूरा कैरेके गेलै
यी संसार कथियोसे भोरल छै त स्वार्थ से मात्रे भोरल छै ।

हम थारूके बेटी
सोझ, इमानदार,पातर छितर वर छनगर
बोलीके पक्का या सत्यवादी
हमर यहया सोझपनके फाइदा उठाइलकै दुनिया
हम रैहगेलियै जैहनङखे तैहनङ या
हमर फाइदा लुइटके बैनगेलै दुनिया
तैदुवारे हम कहैचियै
यी संसार स्वार्थसे भोरल छै ।

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