मुना चौधरी
मेरो अकलुषित मनको दैलो
तिमीले उघार्दा
चाँदनी रातको शीतल वहार आयो
तिम्रो मन्द मुस्कानले
बिना बादलको वर्षात भयो
मेरो मनको बजारमा
तिम्रो आगमणको आभाष भयो ।
झ्यालबाट मनको बजार चियाउँदा
धेरै जनाको चहलपहल थियो
कतिले मोलमोलाई गरे
कतिले प्रेमको मूल्य तोके
कतिले प्रेमको भारी बजारमा
गरे हिसाब
सिधैँ नाफा र घाटाको
त्यही वेला
मेरो मनको बजारमा
तिम्रो आगमणको आभाष भयो ।
अकर्कश तिम्रो हृदयमा
अगत्या ! अकम्यको राग देखेँ
सबै गुणले अक्षुण्ण तिमी
प्रेमको मूल्य तोकेनौ मनको बजारमा
गरेनौ कहिले नाफा र घाटाको हिसाब
तिम्रो अगर्हित र अक्षोभ्य प्रेमले
मेरो मनको बजारमा
तिम्रो आगमणको आभाष भयो ।
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मनके बजारमे
हमर सफा मनके केबार
तोहे खोललिहि ताब
चानि रङ्के राइतके मौसम भेलै
तोहर मुस्कानसे
बिना बादलके बरसात भेलै
हमर मनके बजारमे
तोहर आगमणके अभाष भेलै ।
खिरकि दने मनके बजार लिहारलियै त
बहौत कोइके चहलपहल छेलै
कतेक कोइ मोलमोलाइ करलकै
कतेक कोइ प्रेमके मोल तोकलकै
कतेक कोइ प्रेमके भारी बजारमे
करलकै हिसाप
सिधे नफा या घटाके
तहैबेरमे
हमर मनके बजारमे
तोहर आगमणके अभाष भेलै ।
लरम तोहर हृदयमे
स्नेह या प्रेमके राग देखलियौ
सर्वगुण सम्पन्न तोहे
प्रेमके मोलमोलाइ नै करलिहि मनके बजारमे
कैहयोने करलिहि हिसाप नफा या घटाके
तोहर अगर्हित या अक्षोभ्य प्रेमसे
हमर मनके बजारमे
तोहर आगमणके अभाष भेलै ।