
अन्यााय ओ अत्यचारके बिरुद्द
निमुखा ओ दरिद्रताके बीच
न्याय ओ समानताके बिगुल फुकुईया
शान्ति सद्भावके लडाई लर्ती
मुक्तिके आवाज उठुईया
संविधान ओ संघियता
अनि अधिकारके खुल्ला रंगमञ्चमे
शान्तिके गीत गउईया
जेलर
कैदी
वा राजबन्दि
रेशम चौधरी
दादा तु जेल भित्तरके राजा हुईतो ।
तुहिन फसाईकलाग दादा
यहा सामन्ती ओ स्वार्थी हुक्रे
षड्यन्त्रके सञ्जाल फिजैनै
थरुहट थारुवान आन्दोलनके नाउमे
धेउर ताना बाना बुन्नै
बाहुनवाद ओ नश्लबाद प्रकृतीके मनै
रंगमञ्चमे धेउर अभिनय मञ्चन कर्नै
अधिकारके लराई उत्कर्षमे पुगल बेला
षड्न्त्रके महाजाल फिजैनै
आपन मुन्ता बचाईकलाग
चत्तुर मनै रंग बदल्नै
थरुहट थारुवान आन्दोलनके
भ्रुण हत्या कर्ती
औरेक पार्टीम बिलिन हुईनै
फिर भि जेल भित्तरसे अकेली लरुईया
हिम्मत
साहस
ओ धैर्यवान
रेशम चौधरी
दादा तु जेल भित्तरके राजा हुईतो ।
जव जेल भित्तरसे एकठो
सौगन्ध फूला फेक्रल
तब नेपाली राजनितीमे
अजिव तरंग फैलल
कमल हो या गुलाव
पहिचान कर्ना मुस्किल हुईल
अवसरवादी ओ
नितान्त ब्यक्तिगत सवार्थ बोकल
हजारौं गिरगित
बेली, चमेली, मख्मल
दौना बेब्रीक शृगार लैके
पहिचानके ढकिया देल्वामे
आपन हाथिनहस पौली अत्वाई खोज्नै
सेकल जत्रा घेघर फूलैटी
स्वार्थी हुक्रे चिल्लाई लग्नै
पहिचानके बाजा बजैटी
अवसरमे डान्स कर्टी
छेग्रहुवा भेरहुवा हुक्रे
सिंह दरवार ढाई लग्नै
कैलालीके चार खोभल्टीमे
९९ गोत्तीके जाल लब्दैटी
यि ओ अस्तही
हजारौं मच्छि बझाई सेकुईया
निडर
साहसी
बुद्धिमानी
रेशम चौधरी
दादा तु जेल भित्तरके राजा हुईतो ।
पहिचानके लग जर्मल
पहिचानके भित्रे लत्पटैटी
पहिचानके डगरमे टुकुर टुकुर निगुईया
पहिचानके जो सक्कु जहन निगे सिखुईया
अन्याय ओ अत्यचारके बिरुद्ध
दमन शोषण ओ उत्पिदनमे परल
सर्वहारा वर्गके आवाज
देश ओ दुनियामे बुलुन्द करुइया
आपन अस्तित्व ओ पहिचानमे लागल
कर्तव्य ज्यान डाका चोरी
ज्यान मर्ना उआपन अस्तित्व ओ पहिचानमे लागल
कर्तव्य ज्यान डाका चोरी
ज्यान मर्ना उद्दोगके आगीमे जर्ती
आजिवन जेल जीवन बितुईया
हरेक नेपाली नेतनके भाषनमे
सोनेक टिकली ओ गुलाव फुलक
सौन्दर्यता बनल
मन
मूटु
ओ ढकढिउरा
रेशम चौधरी
दादा तु जेल भित्तरके राजा हुईतो ।
सरकार
अन्धा कानुन बना के
धर्म जाती वर्ग समुदाय फुटाके
भदौ ७ गते कर्या दिन बना के
हमार दिथार आखिमे कर्या पत्ति बाधके
हमार अधिकार लुटे खोज्ती बा
सरकार
कानुन आपन हाथमे लैके
प्रसाशन बजबुट बनाके
जेलमे शरिर बन्धक बनाके
गोरामे फलामके नेल बाधके
हमार पहिचान दबाई खोज्ती बा
सरकार बुझके फे बुझ पचैती बा
कानुन पुलिस प्रशासन मुठठीमे लैके
उत्पिडित जाती वर्ग समुदायमे
लैंगिक, जातिय, धार्मिक सम्प्रदायक
आन्दोलन कर्ना बाध्य पर्ति बा
वर्गिय लराई कर्ना विवश कर्ती बा
अधिकार ओ पहिचानके हमार आन्दोलन
ब्यक्ति वर्ग समुदाय ओ
सिंगो राज्य सत्ता सम पुग्ना तरखरमे बा
जेल भित्तरसे दुनिया हे थर्कमान परुईया
बाघके अवतार
पहिचानके अब्बल
अधिकारके अभियन्ता
आधिं
बौखा
बयाल
रेशम चौधरी
दादा तु जेल भित्तरके राजा हुईतो ।