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प्रबीन “कैलारीक उल्टहुवा भाटु”         

कैलारी-५ बैसपुर (कैलाली)

जब्ब फेन कठो जिन्गिक जोरिया टु व मै।

लोभौरी बैरहसक मैंयम बिश्वास कर्नु जो मै।।
रंगबड्लि फुला जैसिन लोभावन मैयाँ टुहार।

वादा के पक्का मै,कोरे डील नेउछाउर कर्नु जो मै।।
ऐहोर फेन हा ओहर फेन हा गोंज्रा रुपि चाल खेल्लो।

बेकार मे फट्हिक याद म खटोलपाट लेहनु जो मै।।
छाटि, ढकढिउरि के चाल कबु रुकठ कबु बरट।

भित्रिमन जरठ ओैरेक बहियाम देख्ठु जो मै।।
जियम ना मरम ,उटमुटावन लागठ टुहान नाउ जप्ना।

धुँवा बिनाके मुटुमे राह लगैलो आँश लेके बुटाई टु जो मै।।
       

Pencil drawing of Don Quixote

“Do you see over yonder, friend Sancho, thirty or forty hulking giants? I intend to do battle with them and slay them.”

— Don Quixote

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