मुना चौधरी
आइर छितियाके सुतल छै
खेतके चारूभरा
उपरमे घाँस लागल छै
घाँस उपरमे पेरा छै
अपना सुइतके
आद्मी , बकरी छगरी या गाईमालके
लरैले बिछाइने छै
घाँसके मखमली बिछोना ।
रस्ता पेरा लरैवला बटोहि लात मारैछै
ओकर उपर थुक फेकै छै
लेकिन ऊ विरोध नै जनाइछै केकरो,
साइत ओकर मन बरिटा छै
स्वभाव उदार छै
बदला लैके भाव नै छै
ऊ शीतल छै
कंचन छै
सबके अगारी बरहैके
पेरा देखाइछै
अपना जतके ततै सुतल रहैछै
लेकिन दोसरके गन्तव्यमे पुगाइछै ।
बेसी उच या मोट रहै छै तेकरा कहै छै धुर
पातर रहै छै तेकरा कहै छै आइर
ऊ लातके माइर मात्रे नै सहै छै
कोदाइरके माइर सोहो सहै छै
गिरहत कोदाइरसे आइर काइटके
खोरा कोरैछै
ऊ आपन देह काइटके बाइलमे
पाइन पटाइछै या
बाइलके दैछै जीवनदान ।
तोहर जेखा त्यागी कोइने छै अइ संसारमे
तोहर जेखा जीवनदाता नै छै कोइ
हमरा लोभ लागैये तोहर त्याग देखके
हमरा जलन हैये तोहर सहनशिलता देखके ।
हमरो बन्या दे तोहे आपने जेखा
मौन
गुमसुम,
खुसी
त्यागी ।
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