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बाबा कहथ खेत्वा लगैना हुईगिल हरजुवा,लर्हिया बनाउ छावा।
हमार टो अस्टे टस्टे हो टुहरे अपन भविष्य बर्हिया बनाउ छावा।
जमाना चाहे जट्र आगे बर्हजाई मने अपन संस्कृति कब्बु न भुलैहो।
रोज टिनक डारी नाई रहि टटरी,खोङघिया,ढर्हिया बनाउ छावा।

🖋️ निर्मल चौधरी (असफल यात्री)
जानकी – ५ अमौरी,कैलाली

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